Monday, December 21, 2020
Raqib
Monday, December 14, 2020
आईना
आईना देखु तो एक शख्श
नज़र आता है
बेपता , बेहोश , लावारिस
खुद को पाता है ।
अपनी ग़ुरबत में इतना खोया है ,
प्यार से भी उसको खौफ आता है।
,,,,,,
भूत और भविष्य में इतना उलझा है ,
वर्तमान देख के अब वो घबराता है ।
,,,,
मोह और माया में खुदी उलझा है ,
खुदा में कहाँ उसको अब रस आता है
आईना ....
चलता रहता है , गली गली , शहर शहर ,
मंजिलों को कहा कभी भी वो पता है ।
आईना ....
प्रदीfप देवानी ~ pd
Tuesday, December 1, 2020
Monday, November 23, 2020
पुकारूंगा नहीं तुम्हे
पुकारूंगा नहीं तुम्हे
ना ही कोई हठ करूंगा
करता रहूंगा तैयारी
तुम्हारे स्वागत की
सजाता रहूंगा खुद को .....
आ के समा जाना मुझे में
जब भी तेरा मन करे
इस जन्म या अगले जन्म ...
पर समाना कुछ इस तरह
जैसे समा जाती है नदी सागर में ..
...शक्कर दूध में
और मीरा कृष्ण में .....
प्रदीप देवानी ~ PD
Boolanunga nahi tumhe ..
Naa hee koi hath karoonga ..
Karta rahoonga taiyari ..
Tumhare Swagat kee
Sajaata rahoonga khud ko ...
Aake samma jaana mujhe main
Jab tumhara maan kare ..
...
Par samana kuch iss tarah ..
Jaise sama jaati hai nadi sagar main ..
Jaise sama jaati hai shakar dhoodh main
Jaise samayi thi Meera Krishna main
...
Boolaoonga nahi Tumhe
Saturday, November 7, 2020
jawani
Monday, November 2, 2020
ना दिवाली थी ना ईद थी
हर दिन थोड़ा थोड़ा कर के बदला तूने मुझे
और फिर जब मैं काम का ना रहा
तो अपने घर से निकाल फेका मुझे
माना तू बेवफा नहीं
ये सब वक़्त का कसूर था
अब मैं वो कहाँ था
जिस पे तुझे गुरुर था
ना पूर्णिमा थी मेरी
ना ही मेरी अमावस्या थी
सब बदल गया था अब
ना दिवाली थी ना ईद थी
सूरज और चाँद के
ढंग अब कुछ और थे
मैं कहाँ रहा था मैं
ये रंग कुछ और थे। ...
उपरोक्त पंक्तिया एक कैलेंडर द्वारा वर्ष के अंत में कही गयी है।
Thursday, October 15, 2020
सागर
Friday, October 9, 2020
Endlesss
Thursday, September 17, 2020
Kitna ajeeb insaan
Tuesday, June 16, 2020
आज कृष्णा कंस को मरेगा
मैं : बेटा १३ जून।
युविका : ये मजा आयेगा।।। हो हो
मैं: क्या हुआ बेटा ?
युविका : आज कृष्णा कंस को मरेगा। ....
Thursday, June 4, 2020
Thursday, May 7, 2020
मैं यही रहूंगी
मैं.. कही नहीं जाऊंगी मैं यही रहूंगी
आऊंगी याद तुझे हर वक़्त नहीं तो हर रोज.....
मैं रहूंगी कभी तेरी कलम में तेरी कविता का शब्द बन कर
तो कभी रहूंगी तेरी आँख में एक सूखा हुआ आसूं बन कर |1|
मैं .. कही नहीं जाऊंगी....
मैं रहूंगी कभी तेरे सिर पे किसी बुजुर्ग का आशीर्वाद बन के
तो कभी मिलूंगी तुझे रमी में तुरुप का इक्का बन के|2|
मैं कही नहीं जाऊंगी
मैं रहूँंगी हमेशा तेरा उत्साह बन के हर साफ़ नियति में
मैं रहूंगी तेरे पापो की ज़ंजीर बनके हर बदनियति में|3|
मैं .. कही नहीं जाऊंगी ....
प्रदीप देवानी .... PD
Wednesday, May 6, 2020
पीना छोड़ा जीना छोड़ा
यारो के घर जाना छोड़ा
यारो ने घर आना छोड़ा
ग़म के अफ़सानो को छोड़ा
ख़ुशी के पैमानों को छोड़ा
दिल से दिल का नाता बनाते
साकी की हाथों को छोड़ा
पीना छोड़ा जीना छोड़ा ....
ग़ालिब की ग़ज़ल को छोड़ा
बच्चन की मधुशाला को छोड़ा
२ जाम की बाद बनने वाले
सारे दिलजलों को छोड़ा
पीना छोड़ा जीना छोड़ा ....
Tuesday, May 5, 2020
Imperfectly Perfect
This can also be seen in our day to day life very easily. Someone is tall while others are short. Someone is fair in color while others have beautiful hair.
Someone has very attractive eyes while the other has amicable nature.
We all are imperfectly perfect and we all should celebrate this , enjoy this imperfectness.
We all should accept this imperfectly perfect nature not only in ourselves but also in others.
Sad part is we all are running a rat race to achieve Perfectness with imperfection which is impossible and losing the beauty of being Imperfectly Perfect which we are ...
Lets us start enjoying , celebrating and loving this Imperfect Perfectness which we have in all of us .. so that life become more beautiful
Friday, February 14, 2020
ज़िंदा
ज़िंदा है तो जीने का
कोई मतलब तो रख
सांस लेने का नाम
केवल जीना तो नहीं ..
मन में रख ख्वाब कुछ
दिल में कुछ तमनाये भी रख
खाली मन बेरंग जीना
जीना तो नहीं ..
किस्मत में जो है उसका शुक्र कर
जो पास है उसकी कदर कर
गीले शिकवों और दुख में जीना
जीना तो नहीं ...
Thursday, February 13, 2020
ऐ जानेमन
अब क्या लिखू तेरे लिए तू ही ज़िन्दगी तू नाज़ है
मेरी उदास शाम मे जब रात होने वाली हो
मेरे जीवन की कश्ती जब भँवर मे खोने वाली हो
तू बन आइ प्रभात है
ना -खुदा बनके तूने लगाई कशती पार है
ऐ जानेमन तू खास है
ज़िन्दगी मे मेरे जब समुन्द्र मंथन हो रहा
रोजी रोटी के लिए मैं छीन भिन हो रहा
विष को पिके तूने मुझे दिलाई आस है
ऐ जानेमन तू खास है
Monday, February 10, 2020
ख़तम
आगाज से अंजाम तक पहुँचना है
तेरे अलफ़ाज़ बन के कंठ में उतरना है
हाथ मिलाया है आज तुझसे मैंने
जल्द ही तुझसे गले मिलना है
मुझे पता है की तू गैर की अमानत है
जिस्म नहीं मुझ तो रूह में उतरना है
जुदा हो जाएगी तू मुझसे चंद लम्हों में
इन्ही लम्हों में से एक लम्हा पकड़ना है
ज़िन्दगी क्या है बस तेरा मेरा अफसाना
इसी अफ़साने को आफरीन करना है
जन्म जन्म के रिश्ते नहीं मानता लेकिन
इस पल में मुझे खुद को ख़तम करना है ..