Wednesday, December 19, 2018

मानवता

तेरी रजा मे  राज़ी रह कर
तेरा शुक्राना करते हुए ज़िन्दगी बिताऊं
जो है मेरे पास उसको जियूं मैं
कभी ना किसी का दिल दुखाऊँ
ज़िन्दगी कुछ दिनों की दी है जो तूने
उसको हस्ते खेलते बिताऊं
कुछ कर सकूं या ना कर सकूं
बस हो सके तो किसी के काम आऊं



Friday, December 7, 2018

sapne

किसी के सपने मछली जैसे
नींद खुली और तडप जाते
चाय नाश्ते तक आते आते मर जाते
किसी के सपने तितली जैसे
उठते ही उड़ने लगते
कली कली फिरने लगते
रात तक थक के सो जाते है
मेरे सपने जाने कैसे
हमेशा भूत की बात्तों जैसे
पीछे जाते पीछे चलते
मुझको बचपन मे  लेके जाते
कभी हंसा हंसा के रूलाते
कभी रुला रुला के हसांते