कभी जब तुम पुकारो,
और मैं आवाज ना दूं ,
तो समझ जाना की मैं ,
तुम्हारे खयालों में खो गया था ।
कभी जब तुम साथ मांगो,
और मैं साथ ना दूं ,
तो समझ जाना ,
मेरा साथ ना देना ही साथ था ।
कभी जब तुम जीत जाओ ,
और मैं तुम्हारे साथ ना झूमू
तो समझ जाना की,
अभी जीतना बाकी था ।
कभी तुम हार जाओ,
और मैं तुम्हारे साथ ना रोऊं ,
तो समझ जाना की ,
संघर्ष अभी बाकी था ।
प्रदीप देवानी ~pd