Wednesday, May 17, 2023

तुम

 कभी जब तुम पुकारो,

और मैं आवाज ना दूं ,

तो समझ जाना की मैं ,

तुम्हारे खयालों में खो गया था ।


कभी जब तुम साथ मांगो,

और मैं साथ ना दूं ,

तो समझ जाना ,

मेरा साथ ना देना ही साथ था ।


कभी जब तुम जीत जाओ ,

और मैं तुम्हारे साथ ना झूमू

तो समझ जाना की,

अभी जीतना बाकी था ।


कभी तुम हार जाओ,

और मैं तुम्हारे साथ ना रोऊं ,

तो समझ जाना की ,

संघर्ष अभी बाकी था ।

प्रदीप देवानी ~pd

संत

 कितने भी शून्य लगाओ ,

अनंत नही होता ।

बातें करने से ,

कोई संत नहीं होता।।

प्रदीप देवानी ~pd

विरह

 मौत का गम, विरह के गम से काम है ,

ना कोई उम्मीद वापस आने की ,

ना कोई संयोग फिर मिलने का 

अगर मिलते भी तो अगले जन्म ,

जब ना तुम तुम होते और ना मैं मैं ।।।

प्रदीप देवानी ~pd