Tuesday, December 24, 2024

sawaal

बहुत दिनों से मेरे मन में एक सवाल था ,
की उन सवालों का क्या जिन सवालों के कोई जवाब नहीं होते!!

क्या उन सवालों की आत्मा भी , भटकती होगी , जवाबो के लिए ,मुक्ति के लिए ?

क्या तड़प रहे होंगे ये सवाल भी , बादलो की तरह ,
की एक हवा का झोका इनको
बूँद बनाके धरती में मिला दे ?

देख रहे होंगे राह एक मार्गदर्शक की ,
सूखे बीज तरह , जो उन्हें फूल बना दे।

या फिर ये सवाल होंगे खुश , मगन और तंदरुस्त।

इन सवालों को मिला है ,
सबसे ज्यादा गहन चिंतन और मनन का खाना पानी।

दिया है इन सवलों को मैंने ,मेरे समय का एक ख़ास हिस्सा ,
मेरी तनहाई , और मेरी यारी।

फूले नहीं समां रहे होंगे अपना महत्व ,और ऐश्वर्या देख कर।

क्या हुआ होगा इन सवालों का जिनके जवाब नहीं होते।
ये सवाल भी एक बिना जवाब का सवाल ही है।

प्रदीप देवानी~pd

Tuesday, July 2, 2024

sathi

साथी कहते थे वो मुझे अपना
दावा था उनका की हम-साया बनके साथ
 चलेंगे ज़िन्दगी भर।

कुछ दूरी तक चले भी वो मेरे साथ,
कुछ ख्वाहिशों में रंग भरे भी हमने साथ में,
खुशी के त्योहारों में फुलझड़ी की ,
तरह रोशनी बिखरी उन्होंने ।

फिर अचानक प्रकाश मुझसे रूठने लगा ,
जीवन में दुख के अँधेरे का आगमन हुआ
काली घटाओ के पास आते आते ,
हम साये पीछे हटते गए , 
अपनी परछायी भी पराई सी हो गई ।

ये अमावस्या की रात थी,
तारे काले बदलो में छुप गए थे
मैं अकेला ही था
मेरे हम साये  और साथी 
नहीं थे मेरे इर्द गिर्द।

मुझे पता था इस रात की भी सुबह होगी,
फिर मेरे कुछ साये  और साथी होंगे,
बस इस बार मुझे पता होगा की ,
वो मेरे नहीं उगते सूरज के साथी है !!!

Wednesday, June 19, 2024

patriyan

चंद उम्मीदों के रास्ते ,
कुछ ख्वाबों की मंजिल तक
पहुंचने की यात्रा है जिंदगी।

कभी सुख , कभी दुख के स्टेशन ,
पे रुकते रुकते चलते जाने
वाली ट्रेन है जिंदगी ।

किसी प्यारे का बिछड़ना,
किसी साथी का मिलना ,
स्टेशन पर मिलने वाली
मिलावटी चाय है जिंदगी।

किसी को दोस्त बनाते ही ,
कोई दुश्मन बन जाता है
पटरियों के बीच चलने का
नाम है जिंदगी ।

समय के साथ , साथ
सब कुछ बदल जाता है ,
पटरिया बदल बदल कर ,
एक दिन मर जाना है जिंदगी ।
प्रदीप देवानी ~pd