Friday, October 7, 2022

खामोशी

शब्द गुम है , कलम से स्याही है रूठी हुई,
क्या लिखूं और क्या कहूं जब जान है अटकी हुई।

मेहबूब ,बेवफा,दोस्त और रकीब सब गायब हुए ,
जाम है आधा ,मदिरा भी अब प्यासी हुई ।

कोरे कागज और खामोशी को समझना हो तो आ ,
गजल और शाम की बाते अब जूनी हुई ।।

प्रदीप देवानी ~pd

Saturday, June 25, 2022

Ram

 प्रदीप और युविका ( प्रदीप की बेटी) का वार्तालाप 


प्रदीप : "अरे मुहंजा राम जह  खे नोट खपन उन्हें खे नोट दे जाम " ( सिंधी ) " हे मेरे राम जिनको पैसे चाहिये  उनको बहुत पैसे दे दो "


युविका : और जिनको नोट नहीं चाहिये  उनको ?

प्रदीप: ऐसा कोई नहीं है जिसको नहीं चाहिये 

युविका : तो आपको क्या चाहिये ?

प्रदीप: मुझे राम चाहिये 

युविका : (खुद की तरफ इशारा करते हुए) तो ये है तो आपके पास 


बातों-२ में कितनी गहरी बात बता दी युविका ने , अगर हम हमारे आस पास , हमारे घरवालों में ही राम  नहीं देख पा रहे है तो हमे राम मिलेगा कैसे ? राम तो तब तक नहीं मिलता जब तक वो हमे सब जगह नहीं दिखने लग जाता है।  


Dohe

 कर कर कर कर मैं थका ,

मिला न जग मैं कोही,

अकर्ता बन बैठा तो

प्राप्त  मोक्ष होई !!!


ज्ञानी ऐसा भटके है ,

माया मिले ना राम ,

जाना जिसने सत्य को ,

उसको बस विश्राम !!


अज्ञानी तो भटके ही ,

ज्ञानी भटके घोर ,

बिन जाने मिलता नहीं ,

ज्ञानी को भी ठौर !!


माया मिली ना राम मिला ,

भर भर मिला है ज्ञान ,

ना जाना जब सत्य को ,

फिर कैसा विश्राम !!



Friday, June 3, 2022

अजीब शाम

ये शाम भी बहुत अजीब है ,
ना तुम हो , ना तन्हाई है ,
ना गम है , ना रुसवाई है,
चारो तरफ बस एक परछाई है 
उस परछाई में खोज है
कुछ बातों की , कुछ यादों की 
कुछ फिर ना होने वाली मुलाकातों की।।
प्रदीप देवानी ~pd

Saturday, May 28, 2022

" अहं ब्रह्मास्मि "

" अहं ब्रह्मास्मि " .. 

" अहं ब्रह्मास्मि " भारतीय उपनिषदों का एक महावाक्य है , इस महावाक्य को समझने की तरफ एक प्रयास करने जा रहा हूँ। 

"sacred games " ( Popular Web Series on Netflix), देखने वाली भारतीय युवा पीड़ी के सामने " अहं ब्रह्मास्मि "का एक और अर्थ बताना बहुत जरूरी समझा नहीं तो इस पीढ़ी को तो यही लगता रहता की " अहं ब्रह्मास्मि " का अर्थ है की "अपुन ही भगवन है" 


सबसे पहले " अहं ब्रह्मास्मि " एक संस्कृत का श्लोक है, इसका हिंदी अनुवाद समझ लेते है , " अहं ब्रह्मास्मि "का जो प्रचलित अनुवाद है " मैं  ब्रह्मा हूँ" या " मैं भगवान हूँ ".. मुझे जो " अहं ब्रह्मास्मि " का सही अनुवाद लगता है वो है "मैं ब्रह्म हूँ " ना की "मैं ब्रह्मा हूँ" .ये महावाक्य उन महान ऋषियों ने कहा है जो स्वय ब्रह्म हो गए ना की ब्रह्मा। 

ब्रह्म शब्द का शाब्दिक अर्थ है जो निरंतर विस्तारित हो रहा है फैल रहा है , या कहे की जन्म ले रहा है , इसलिए हिंदुओं ने जन्म देने वाले भगवान को ब्रह्मा नाम दिया ।

 " अहं ब्रह्मास्मि " का महावक्य बोलने वाले ऋषि का अर्थ ब्रह्म हो जाने की घोषणा है ना की ब्रह्मा।

सत्य के मिल जाने के बाद ऋषि भी ब्रह्म की तरह , सदा विस्तारित हो रहे है , फैल रहे है , जन्म ले रहे है या यूं कहे की ऋषि इस विराट संसार के साथ जी सदा फैल रहा है , जो ब्रह्म है , एक हो गए है , सब अब केवल परमात्मा ही है , इसलिए उन्होंने घोषणा की है  " अहं ब्रह्मास्मि " ।

P.S:  मेरी चेतना अभी जितना समझ पाई उतना कलम से लिख दिया है ।



दिल की दूरियां

जिस्मों की दूरियों को मापने के 
पैमाने है बहुत 

कोई पैमाना बता जिससे 
दिल की दूरियां बता सकूं 

वाहन  कई है 
जिस्मों की दूरियां मिटाने को 

कोई जरिया बता दिल की दूरियां 
मिटा सकूं 

प्रदीप देवानी ~ pd



Tuesday, May 3, 2022

Hari om

हरि ॐ

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"हरि ॐ" हिन्दू परिवारों द्वारा बोला जाने वाला बहुत प्रचिलित अभिवादन है। मेरे घर में भी इस अभिवादन का प्रयोग होता है। आज का मेरा लेख इस अभिवादन "हरि ॐ" को समझने की तरफ एक छोटा सा प्रयास है।

 

पहले हम "हरि" शब्द को समझ लेते है , "हरि" शब्द का  अर्थ है , "जो हर लेता हो", मतलब जो चोरी कर लेता हो , मतलब एक तरीके से चोर।  केवल भारतीय मनीषा में ही भगवान् के लिए इतने प्यारे और अनूठे शब्द का प्रयोग किया गया है, हरि मतलब हरने वाला , जो हर लेता हो , हमारे सुख दुःख , और सबसे ज्यादा हमारा अहंकार , हमारी मैं।

 

अब समझते है ॐ को , ॐ कोई शब्द नहीं है ना ही कोई अक्षर है , इसलिए ॐ को लिखने के लिए एक प्रतीक सिंबल है , ना की कोई शब्द या अक्षर। 

तो फिर ॐ है क्या ? ॐ बना है  "अ- ऊ - म" इन तीन ध्वनियों से , हमारी बाकी पूरी भाषा , आवाज भी इन तीनो ध्वनियों का ही जोड़ है।  ॐ है हमारी आवाज़ का प्रारम्भ , मध्य और अंत।

 

अब बात करते है हरि ॐ की , हरि का मतलब हुआ चोर या हरने वाला और ॐ का मतलब हुआ हमारी साड़ी ध्वनियाँ , आवाज या हमारा शोर।  जब हम कहते है हरी ॐ , तो हम हरि को , उस हरने वाले को विनती करते है की हमारे अंदर की साड़ी ध्वनियों को , हमारे अन्दर के सारे शोर को , हमारे सारे विचारो को , जिस वजह से हमारा अहंकार पैदा हुआ है, उसे हर लो, और हम मुक्त कर दो।।

 

हरि ॐ

Pradeep Dewani ~pd

Sunday, April 10, 2022

जमाने

चिड़िया , तितली, बादल
सब अनजाने हो गए
बड़े शहर को हम क्या निकले
अपने अफसाने हो गए ।

चांद , तारों के नीचे सोए
मुझे जमाने हो गए है ।

दादी नानी के बताए किस्से 
अब पुराने हो गए है 

गिल्ली डंडा , पतंग लट्टू,
मोबाइल में सब खो गए है ।
दोस्तों संग बैठ सुख दुख 
बांट पाऊं,
इस इंतजार में सुख दुख 
पुराने हो गए है ।।

प्रदीप देवानी ~ pd

Tuesday, March 8, 2022

याद

दिल की ये चाहत की तुम याद ना आओ ,
भी तो तुम्हे चाहना और याद रखना ही है ।

प्रदीप देवानी ~pd

Monday, March 7, 2022

हौसला ए जुनून

तेरे इस सफर में ए जिन्दगी ,
हमको मंजूर है हर शरारत तेरी 

कही हो खुशी तो उदासी कही
हमको मंजूर है हर नजाकत तेरी 

तू बदलती रहती है मंजर
हमको मंजूर है ये खिलाफत तेरी

आजमाने से पहले बस ये रखना ध्यान
हौसला ए जुनून बाकी है हममें अभी ।।।

प्रदीप देवानी ~pd