हर दिन नयी तलाश है , ऐ जानेमन तू ख़ास है
अब क्या लिखू तेरे लिए तू ही ज़िन्दगी तू नाज़ है
मेरी उदास शाम मे जब रात होने वाली हो
मेरे जीवन की कश्ती जब भँवर मे खोने वाली हो
तू बन आइ प्रभात है
ना -खुदा बनके तूने लगाई कशती पार है
ऐ जानेमन तू खास है
ज़िन्दगी मे मेरे जब समुन्द्र मंथन हो रहा
रोजी रोटी के लिए मैं छीन भिन हो रहा
विष को पिके तूने मुझे दिलाई आस है
ऐ जानेमन तू खास है
अब क्या लिखू तेरे लिए तू ही ज़िन्दगी तू नाज़ है
मेरी उदास शाम मे जब रात होने वाली हो
मेरे जीवन की कश्ती जब भँवर मे खोने वाली हो
तू बन आइ प्रभात है
ना -खुदा बनके तूने लगाई कशती पार है
ऐ जानेमन तू खास है
ज़िन्दगी मे मेरे जब समुन्द्र मंथन हो रहा
रोजी रोटी के लिए मैं छीन भिन हो रहा
विष को पिके तूने मुझे दिलाई आस है
ऐ जानेमन तू खास है
No comments:
Post a Comment