Friday, January 19, 2018

रकीब

बहूत ज़ख्म पाले हो ,
 एक अरसे  से सीने  में  .

मरहम लगाया होता तो नासूर नहीं होते



किसी को माफ़ किया होता
किसी से माफ़ी मांगी होती

तो ज़िन्दगी तेरे इतने रकीब  नहीं होते



नासूर = ऐसा दर्द जीका कोई इलाज़ नहीं
अरसे = समय
रकीब = दुश्मन