Thursday, May 7, 2020

मैं यही रहूंगी














मैं.. कही नहीं जाऊंगी    मैं यही रहूंगी
आऊंगी याद तुझे  हर वक़्त नहीं तो हर रोज.....

मैं रहूंगी  कभी तेरी कलम में  तेरी कविता का शब्द  बन कर
तो कभी  रहूंगी तेरी आँख में एक सूखा हुआ आसूं बन कर |1|

मैं .. कही नहीं जाऊंगी....

मैं रहूंगी कभी तेरे सिर पे  किसी बुजुर्ग का  आशीर्वाद  बन के
तो कभी मिलूंगी तुझे रमी में तुरुप का इक्का बन के|2|

मैं  कही नहीं जाऊंगी

मैं रहूँंगी  हमेशा तेरा उत्साह बन के हर साफ़ नियति में
मैं रहूंगी तेरे पापो की ज़ंजीर बनके हर बदनियति में|3|

मैं .. कही नहीं जाऊंगी ....


प्रदीप देवानी  ....  PD




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