मुझसे मैं होने की पहचान मांगता है ,
मेरा अक्स मेरे गुन्हाओ का हिसाब मांगता है !!
किस किस गुनाह का हिसाब दू तुझे मैं प्रदीप ,
हर पल गुनाह करके खुद को बेगुनाह मानता है !!
मेरा अक्स मेरे गुन्हाओ का हिसाब मांगता है !!
किस किस गुनाह का हिसाब दू तुझे मैं प्रदीप ,
हर पल गुनाह करके खुद को बेगुनाह मानता है !!