Saturday, May 28, 2022

" अहं ब्रह्मास्मि "

" अहं ब्रह्मास्मि " .. 

" अहं ब्रह्मास्मि " भारतीय उपनिषदों का एक महावाक्य है , इस महावाक्य को समझने की तरफ एक प्रयास करने जा रहा हूँ। 

"sacred games " ( Popular Web Series on Netflix), देखने वाली भारतीय युवा पीड़ी के सामने " अहं ब्रह्मास्मि "का एक और अर्थ बताना बहुत जरूरी समझा नहीं तो इस पीढ़ी को तो यही लगता रहता की " अहं ब्रह्मास्मि " का अर्थ है की "अपुन ही भगवन है" 


सबसे पहले " अहं ब्रह्मास्मि " एक संस्कृत का श्लोक है, इसका हिंदी अनुवाद समझ लेते है , " अहं ब्रह्मास्मि "का जो प्रचलित अनुवाद है " मैं  ब्रह्मा हूँ" या " मैं भगवान हूँ ".. मुझे जो " अहं ब्रह्मास्मि " का सही अनुवाद लगता है वो है "मैं ब्रह्म हूँ " ना की "मैं ब्रह्मा हूँ" .ये महावाक्य उन महान ऋषियों ने कहा है जो स्वय ब्रह्म हो गए ना की ब्रह्मा। 

ब्रह्म शब्द का शाब्दिक अर्थ है जो निरंतर विस्तारित हो रहा है फैल रहा है , या कहे की जन्म ले रहा है , इसलिए हिंदुओं ने जन्म देने वाले भगवान को ब्रह्मा नाम दिया ।

 " अहं ब्रह्मास्मि " का महावक्य बोलने वाले ऋषि का अर्थ ब्रह्म हो जाने की घोषणा है ना की ब्रह्मा।

सत्य के मिल जाने के बाद ऋषि भी ब्रह्म की तरह , सदा विस्तारित हो रहे है , फैल रहे है , जन्म ले रहे है या यूं कहे की ऋषि इस विराट संसार के साथ जी सदा फैल रहा है , जो ब्रह्म है , एक हो गए है , सब अब केवल परमात्मा ही है , इसलिए उन्होंने घोषणा की है  " अहं ब्रह्मास्मि " ।

P.S:  मेरी चेतना अभी जितना समझ पाई उतना कलम से लिख दिया है ।



दिल की दूरियां

जिस्मों की दूरियों को मापने के 
पैमाने है बहुत 

कोई पैमाना बता जिससे 
दिल की दूरियां बता सकूं 

वाहन  कई है 
जिस्मों की दूरियां मिटाने को 

कोई जरिया बता दिल की दूरियां 
मिटा सकूं 

प्रदीप देवानी ~ pd



Tuesday, May 3, 2022

Hari om

हरि ॐ

--------------------------------------------------------------------------------------------------

"हरि ॐ" हिन्दू परिवारों द्वारा बोला जाने वाला बहुत प्रचिलित अभिवादन है। मेरे घर में भी इस अभिवादन का प्रयोग होता है। आज का मेरा लेख इस अभिवादन "हरि ॐ" को समझने की तरफ एक छोटा सा प्रयास है।

 

पहले हम "हरि" शब्द को समझ लेते है , "हरि" शब्द का  अर्थ है , "जो हर लेता हो", मतलब जो चोरी कर लेता हो , मतलब एक तरीके से चोर।  केवल भारतीय मनीषा में ही भगवान् के लिए इतने प्यारे और अनूठे शब्द का प्रयोग किया गया है, हरि मतलब हरने वाला , जो हर लेता हो , हमारे सुख दुःख , और सबसे ज्यादा हमारा अहंकार , हमारी मैं।

 

अब समझते है ॐ को , ॐ कोई शब्द नहीं है ना ही कोई अक्षर है , इसलिए ॐ को लिखने के लिए एक प्रतीक सिंबल है , ना की कोई शब्द या अक्षर। 

तो फिर ॐ है क्या ? ॐ बना है  "अ- ऊ - म" इन तीन ध्वनियों से , हमारी बाकी पूरी भाषा , आवाज भी इन तीनो ध्वनियों का ही जोड़ है।  ॐ है हमारी आवाज़ का प्रारम्भ , मध्य और अंत।

 

अब बात करते है हरि ॐ की , हरि का मतलब हुआ चोर या हरने वाला और ॐ का मतलब हुआ हमारी साड़ी ध्वनियाँ , आवाज या हमारा शोर।  जब हम कहते है हरी ॐ , तो हम हरि को , उस हरने वाले को विनती करते है की हमारे अंदर की साड़ी ध्वनियों को , हमारे अन्दर के सारे शोर को , हमारे सारे विचारो को , जिस वजह से हमारा अहंकार पैदा हुआ है, उसे हर लो, और हम मुक्त कर दो।।

 

हरि ॐ

Pradeep Dewani ~pd