Wednesday, February 17, 2021

बचपन

ज्यादा कुछ नहीं मांग रहा हूं
जो मेरा था लौटा दे मुझको 
छीना है जो बचपन तूने 
उस से फिर से मिला दे मुझको
मेरा बचपन लौटा दे मुझको ।।।

निर्मल मन हो , चिंता रहित हो 
भूत भविष्य की ना कोई फ़िक्र हो 
खेल खिलौनों वाला जीवन 
गुडे , गुड़िया वाला जीवन 

ज्यादा कुछ नहीं मांग रहा हूं ।।।।

राग नहीं हो द्वेष नहीं हो 
अपने पराए का भेद नहीं हो 
वासुदेव कुटुंबकम् वाला जीवन
अपनी मर्ज़ी वाला जीवन 

ज्यादा कुछ नहीं मांग रहा हूं।।।

प्रदीप देवानी ~pd

Tuesday, February 2, 2021

khel