Wednesday, June 19, 2024

patriyan

चंद उम्मीदों के रास्ते ,
कुछ ख्वाबों की मंजिल तक
पहुंचने की यात्रा है जिंदगी।

कभी सुख , कभी दुख के स्टेशन ,
पे रुकते रुकते चलते जाने
वाली ट्रेन है जिंदगी ।

किसी प्यारे का बिछड़ना,
किसी साथी का मिलना ,
स्टेशन पर मिलने वाली
मिलावटी चाय है जिंदगी।

किसी को दोस्त बनाते ही ,
कोई दुश्मन बन जाता है
पटरियों के बीच चलने का
नाम है जिंदगी ।

समय के साथ , साथ
सब कुछ बदल जाता है ,
पटरिया बदल बदल कर ,
एक दिन मर जाना है जिंदगी ।
प्रदीप देवानी ~pd