आगाज से अंजाम तक पहुँचना है
तेरे अलफ़ाज़ बन के कंठ में उतरना है
हाथ मिलाया है आज तुझसे मैंने
जल्द ही तुझसे गले मिलना है
मुझे पता है की तू गैर की अमानत है
जिस्म नहीं मुझ तो रूह में उतरना है
जुदा हो जाएगी तू मुझसे चंद लम्हों में
इन्ही लम्हों में से एक लम्हा पकड़ना है
ज़िन्दगी क्या है बस तेरा मेरा अफसाना
इसी अफ़साने को आफरीन करना है
जन्म जन्म के रिश्ते नहीं मानता लेकिन
इस पल में मुझे खुद को ख़तम करना है ..
1 comment:
Awesome👏👏
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