Saturday, July 13, 2019

पक्की क्यों होती है

ये कच्ची उम्र की मोहबत। . इतनी पक्की क्यों होती है 

ना धर्म ना जात , ना रंग 
ना उम्र का लिहाज़ 
उन आंसुओं की रंगत इतनी अच्छी क्यों होती है ,,


ना छुरी ना चाकू , न बन्दूक 
फिर भी दिल पे वार ,उन कातिलों की सोहबत 
इतनी सच्ची क्यों होती है 

ये कच्ची उम्र की मोहबात  .. इतनी पक्की क्यों होती है 

ना वक्त , ना पैसा , ना राह ,
ना ही मंजिल का गुमान ,फिर भी सब कुछ पाने की,
कोशिश क्यों होती है ।

ये कच्ची उम्र की मोहबात .. इतनी पक्की क्यों होती है 

उम्मीद , ख्वाब , और जज्बातों ,
के सहारे  चलती है वो दुनिया ,
उसी उम्र में सच्ची मोहब्बत क्यों होती है ।

ये कच्ची उम्र की मोहबात .. इतनी पक्की क्यों होती है 
प्रदीप देवानी ~pd