तुमको अपनी गाथा सुनाऊं,
क्या खोया क्या पाया मैंने ,
उसका कुछ हिसाब बतलाऊं।
मस्त मौला था गगन में ,
चलता था अपनी ही धुन में
जब तक मैं छोटा बच्चा था
लोभ लालच ना था मन में।।
फिर मैं थोड़ा बड़ा हुआ ,
समाज ने संस्कार दिया,
मेरे मन में भेद बड़ा,
जाना कुछ अच्छा है कुछ है बुरा।
फिर अच्छा पाने की अभिलाषा में,
मेहनत करके आगे बड़ा ,
कुछ पाया कुछ खोया मैने ,
अनुभव भी खूब मिला।
एक बात जो समझी वो बतलाऊ,
की होता है ये समय बड़ा ,
कर देता है अच्छे को बुरा ,
और कभी बुरे को अच्छा ।
समय के साथ आगे बड़ो तुम,
अच्छे बुरे को पहचान,
अपना अनुभव साथ रखो ,
ना किसी और की बात को
सत्य जानो।।।
🙏🙏