Monday, December 14, 2020

आईना

आईना देखु तो एक शख्श 

नज़र आता है 

बेपता , बेहोश , लावारिस 

खुद को पाता  है ।

अपनी ग़ुरबत में इतना खोया है ,

प्यार से भी उसको खौफ आता है।

,,,,,,

भूत और भविष्य में इतना उलझा है ,

वर्तमान देख के अब वो घबराता है ।

,,,,

मोह और माया में खुदी उलझा है ,

खुदा में कहाँ उसको अब रस आता है

आईना  ....

चलता रहता है , गली गली , शहर शहर ,

मंजिलों को कहा कभी भी वो पता है ।

आईना  ....


प्रदीfप देवानी ~  pd 



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