Monday, June 12, 2023

jeev Bramh aur aatma

हर चीज को दो तरीकों से जाना जा सकता है , एक उसका रूप और दूसरा उसका स्वरूप।
जैसे की गहने ( कंगन , झुमका ,हार आदि) ये सब सोने (गोल्ड) के रूप है और सोना इनका स्वरूप।
हम सब जीव भी इसी तरह है आत्म या ब्रह्म ही पर कोई प्रदीप बना बैठा है तो कोई अर्जुन  या यूं कहिए की कोई इंसान कोई जानवर , कोई जीव कोई पत्थर ।
अब बात ये है की कंगन को कैसे पता लगेगा की वो सोना है कंगन नही ?
या अर्जुन कैसे पता करे की वो ब्रह्म है , आत्मा है अर्जुन नही ?
कंगन को पिगलना होगा , आग में जलना होगा , तब जाके वो अपने रूप को छोड़ अपने स्वरूप को पाएगा , इसी तरह अर्जुन या जीव को भी अपने अहंकार को पिगलाना होगा , तभी वो जान पाएगा की वो आत्मा है ब्रह्म नही ।
जानने वालों ने बताया है की यही पर जीव से गलती हो जाती है , वो जानने नही पर मानने लग जाता है की वो आत्मा है या ब्रह्म है , जानने की कोशिश भी नही करता बस मान जाता है और दोहराए चला जाता है " अहम ब्रमहस्मी"

प्रदीप देवानी ~pd