Saturday, June 25, 2022

Ram

 प्रदीप और युविका ( प्रदीप की बेटी) का वार्तालाप 


प्रदीप : "अरे मुहंजा राम जह  खे नोट खपन उन्हें खे नोट दे जाम " ( सिंधी ) " हे मेरे राम जिनको पैसे चाहिये  उनको बहुत पैसे दे दो "


युविका : और जिनको नोट नहीं चाहिये  उनको ?

प्रदीप: ऐसा कोई नहीं है जिसको नहीं चाहिये 

युविका : तो आपको क्या चाहिये ?

प्रदीप: मुझे राम चाहिये 

युविका : (खुद की तरफ इशारा करते हुए) तो ये है तो आपके पास 


बातों-२ में कितनी गहरी बात बता दी युविका ने , अगर हम हमारे आस पास , हमारे घरवालों में ही राम  नहीं देख पा रहे है तो हमे राम मिलेगा कैसे ? राम तो तब तक नहीं मिलता जब तक वो हमे सब जगह नहीं दिखने लग जाता है।  


Dohe

 कर कर कर कर मैं थका ,

मिला न जग मैं कोही,

अकर्ता बन बैठा तो

प्राप्त  मोक्ष होई !!!


ज्ञानी ऐसा भटके है ,

माया मिले ना राम ,

जाना जिसने सत्य को ,

उसको बस विश्राम !!


अज्ञानी तो भटके ही ,

ज्ञानी भटके घोर ,

बिन जाने मिलता नहीं ,

ज्ञानी को भी ठौर !!


माया मिली ना राम मिला ,

भर भर मिला है ज्ञान ,

ना जाना जब सत्य को ,

फिर कैसा विश्राम !!



Friday, June 3, 2022

अजीब शाम

ये शाम भी बहुत अजीब है ,
ना तुम हो , ना तन्हाई है ,
ना गम है , ना रुसवाई है,
चारो तरफ बस एक परछाई है 
उस परछाई में खोज है
कुछ बातों की , कुछ यादों की 
कुछ फिर ना होने वाली मुलाकातों की।।
प्रदीप देवानी ~pd