प्रदीप और युविका ( प्रदीप की बेटी) का वार्तालाप
प्रदीप : "अरे मुहंजा राम जह खे नोट खपन उन्हें खे नोट दे जाम " ( सिंधी ) " हे मेरे राम जिनको पैसे चाहिये उनको बहुत पैसे दे दो "
युविका : और जिनको नोट नहीं चाहिये उनको ?
प्रदीप: ऐसा कोई नहीं है जिसको नहीं चाहिये
युविका : तो आपको क्या चाहिये ?
प्रदीप: मुझे राम चाहिये
युविका : (खुद की तरफ इशारा करते हुए) तो ये है तो आपके पास
बातों-२ में कितनी गहरी बात बता दी युविका ने , अगर हम हमारे आस पास , हमारे घरवालों में ही राम नहीं देख पा रहे है तो हमे राम मिलेगा कैसे ? राम तो तब तक नहीं मिलता जब तक वो हमे सब जगह नहीं दिखने लग जाता है।