Tuesday, June 25, 2019

रास्ता या मंजिल

 जन्म लेते ही हम सब का एक  सफर शरू हो जाता है।

हमारे सफर के अपने अपने साथी होते है , अपने अपने दोस्त और अपने अपने दुश्मन भी होते है।

हम सब के सफर की गति भी अलग अलग होती है ,  और इस लाजवाब सफर के लिए हम सबको अलग अलग टिकट भी मिला है जो हम सबको एक  मंजिल तक अलग अलग रास्तों से पहुँचता है।

बस फर्क ये है किसी को ट्रैन का जनरल टिकट तो किसी को प्लेन का बिज़नेस क्लास टिकट मिला हुआ है।

 इस सफर की खास बात ये है की हमारे पास टिकट अपग्रेड और डाउन ग्रेड का भी मौका है।  हम अपने कर्मों से टिकट तो अपग्रेड  या डाउन ग्रेड करवा सकते है


हम सबके सफर की मंजिल एक ही है चाहे हमारे पास किसी भी तरह का  टिकट हो। रास्ता अलग अलग होगा पर मंजिल एक। 

इस सफर का जो भी टिकट आपके पास है उसका लुफ्त उठाये , किसी का टिकट अपग्रेड करने मे  अगर मदद कर सकते है तो करे , कभी अपना टिकट डाउन ग्रेड हो जाये तो घबराये नहीं , क्युकी मंजिल तो एक ही है,  नए दोस्त बनाये , जो गीले शिकवे  है वो मिटाये।

लेकिन हम सब की वो कॉमन मंजिल है क्या ?

जो हम सब की कॉमन  मंजिल है वो है मौत , जहाँ हम सब को पहुँचना है और इस मंजिल का हम कभी लुफ्त नहीं उठा पाएंगे, इसलिए जितना हो सके इस सफर का लुफ्त उठाये , रास्ते का लुफ्त उठाये।

अगर स्लीपर मैं है तो उसका भी और बिज़नेस क्लास मैं है तो उसका भी , बिना ये सोचे हुए की मेरी टिकट ये क्यों है ? मेरी टिकट कब अपग्रेड होगी ? उसकी अपग्रेडेड क्लास मे  इतनी सुविधा क्यों है ?

क्यूंकि मंजिल तो सबकी एक ही है चाहे वो किसी भी क्लास में सफर कर रहा हो।

इसलिए रास्ते का लुफ्त उठाये क्यूंकि मंजिल का लुफ्त उठा नहीं पाएंगे ,  ज़िन्दगी एक सफर है  मंजिल नहीं।  




Thursday, June 20, 2019

प्यार

अगर लोग मुझे पागल नहीं कहते
तो मेरे प्यार करने का कोई मतलब नहीं है