Friday, June 3, 2022

अजीब शाम

ये शाम भी बहुत अजीब है ,
ना तुम हो , ना तन्हाई है ,
ना गम है , ना रुसवाई है,
चारो तरफ बस एक परछाई है 
उस परछाई में खोज है
कुछ बातों की , कुछ यादों की 
कुछ फिर ना होने वाली मुलाकातों की।।
प्रदीप देवानी ~pd

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