Sunday, April 10, 2022

जमाने

चिड़िया , तितली, बादल
सब अनजाने हो गए
बड़े शहर को हम क्या निकले
अपने अफसाने हो गए ।

चांद , तारों के नीचे सोए
मुझे जमाने हो गए है ।

दादी नानी के बताए किस्से 
अब पुराने हो गए है 

गिल्ली डंडा , पतंग लट्टू,
मोबाइल में सब खो गए है ।
दोस्तों संग बैठ सुख दुख 
बांट पाऊं,
इस इंतजार में सुख दुख 
पुराने हो गए है ।।

प्रदीप देवानी ~ pd

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