की उन सवालों का क्या जिन सवालों के कोई जवाब नहीं होते!!
क्या उन सवालों की आत्मा भी , भटकती होगी , जवाबो के लिए ,मुक्ति के लिए ?
क्या तड़प रहे होंगे ये सवाल भी , बादलो की तरह ,
की एक हवा का झोका इनको
बूँद बनाके धरती में मिला दे ?
देख रहे होंगे राह एक मार्गदर्शक की ,
सूखे बीज तरह , जो उन्हें फूल बना दे।
या फिर ये सवाल होंगे खुश , मगन और तंदरुस्त।
इन सवालों को मिला है ,
सबसे ज्यादा गहन चिंतन और मनन का खाना पानी।
दिया है इन सवलों को मैंने ,मेरे समय का एक ख़ास हिस्सा ,
मेरी तनहाई , और मेरी यारी।
फूले नहीं समां रहे होंगे अपना महत्व ,और ऐश्वर्या देख कर।
क्या हुआ होगा इन सवालों का जिनके जवाब नहीं होते।
ये सवाल भी एक बिना जवाब का सवाल ही है।
प्रदीप देवानी~pd
No comments:
Post a Comment