मौत का गम, विरह के गम से काम है ,
ना कोई उम्मीद वापस आने की ,
ना कोई संयोग फिर मिलने का
अगर मिलते भी तो अगले जन्म ,
जब ना तुम तुम होते और ना मैं मैं ।।।
प्रदीप देवानी ~pd
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