Monday, November 15, 2021

अपूर्ण

है सब अपूर्ण यहां पूर्ण की चाहत में ,
भटक रहे इधर उधर कुछ पाने की चाहत में,
ना पता मंजिल का ना रास्ते की खबर उन्हें,
उलझे हुए है अपने ही बनाए कुछ जालों में।।
प्रदीप देवानी~pd

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