Thursday, April 4, 2019

अजनबी शहर

तेरी पनाह मे रहना अच्छा लगता है
तेरा रूप रंग नैन नक़्श बाता है
तेरा  चाल चलन भी चंगा भला है

बारिश की बूंदे जब तुझे नहलाती है
तो तेरा बदन फ़िज़ा मैं खुश्बू फैला देता है

तुझे और गहराई से जानना , पहचानना,
अच्छा लगता है

तूने गहरे पानी मे
समां जाने की बजाये तैरना सिखाया  है

चलना सिखाया है तूने बिना रुके
बिना थके सहयाद्रि के ऊँचे पहाड़ो  पे

पर ये सब होते हुए भी तुझसे
प्यार हो  है ऐ मेरे अजनबी शहर

तू मेरा होके  भी अजनबी है ए  मेरे पुणे शहर


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