Monday, January 21, 2019

कुछ दम

वो पूछती है की इतने हैरान परेशान क्यों हो 
एक पल को सोचा बताऊँ  फिर टाल दिया 

पर वो पढ़ लेती मेरे चहरे  की शिकन को 
और मेरी आँखों  की हैरत को 

जिक्र ना किया कुछ मैंने 
मेरे ग़म - ए - शब् की बातों का 

उस बात को क्यों छेड़ू  मैं 
जिस बात का कुछ हल ना हो 

उस बात को क्यों छेड़ू मैं 
जिस बात मे  कुछ दम ना हो 

तू आबाद रहे सदा 
चाहे मेरे शब् की सुबह  ना हो। 

1 comment:

Unknown said...

Very nice....aapko me nai to or kaun janega