Wednesday, May 27, 2026

आधा चाँद

[23/05, 9:55 pm] pradeep: इक परिन्दा निकला ,
अपने घोसले से ,
अच्छे दाने पानी ,
एक मजबूत और बड़े घोंसले की तलाश में।
उड़ते उड़ते आ गया ,
बहुत दूर ,
की उसने बहुत मेहनत ,
मिल भी गया उसे मजबूत घोसला ,
और तंदरूस्त शरीर ,
वो वापस लौटा , अपने पुराने घोंसले में , बताने के लिए अपनों को ,
अपनी सफलता ।
उसने पाया की अपनी सफलता की दौड़ में उसने अपनों को खो दिया था।
अपने तो थे पर अपनापन नहीं था ।
[24/05, 12:35 am] pradeep: आज चांद आधा है ,
हमारी आधी अधूरी बातों ,
आधे अधूरे विश्वास और आधे अधूरे साथ की तरह ।
हमारी तरह चांद को भी नहीं पता की 
वो पूर्णता की पूर्णिमा की तरफ जा रहा है,
या शून्यता की अमावस्या की तरफ, बस चला ही जा रहा है ।
पर क्या ही फरक पड़ता है ,
अंधेरी रात में तो हम हैं  ,चल रहे है और सफ़र में भी है ।
बिना किसी मंज़िल के ।
पूर्ण भी तो एक शून्य ही उत्पन करता है , और शून्य ही पूर्ण की तरफ लेके जाता है ।।।

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