ज्यादा कुछ नहीं मांग रहा हूं
जो मेरा था लौटा दे मुझको
छीना है जो बचपन तूने
उस से फिर से मिला दे मुझको
मेरा बचपन लौटा दे मुझको ।।।
निर्मल मन हो , चिंता रहित हो
भूत भविष्य की ना कोई फ़िक्र हो
खेल खिलौनों वाला जीवन
गुडे , गुड़िया वाला जीवन
ज्यादा कुछ नहीं मांग रहा हूं ।।।।
राग नहीं हो द्वेष नहीं हो
अपने पराए का भेद नहीं हो
वासुदेव कुटुंबकम् वाला जीवन
अपनी मर्ज़ी वाला जीवन
ज्यादा कुछ नहीं मांग रहा हूं।।।
प्रदीप देवानी ~pd
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