किसी के सपने मछली जैसे
नींद खुली और तडप जाते
चाय नाश्ते तक आते आते मर जाते
किसी के सपने तितली जैसे
उठते ही उड़ने लगते
कली कली फिरने लगते
रात तक थक के सो जाते है
मेरे सपने जाने कैसे
हमेशा भूत की बात्तों जैसे
पीछे जाते पीछे चलते
मुझको बचपन मे लेके जाते
कभी हंसा हंसा के रूलाते
कभी रुला रुला के हसांते
नींद खुली और तडप जाते
चाय नाश्ते तक आते आते मर जाते
किसी के सपने तितली जैसे
उठते ही उड़ने लगते
कली कली फिरने लगते
रात तक थक के सो जाते है
मेरे सपने जाने कैसे
हमेशा भूत की बात्तों जैसे
पीछे जाते पीछे चलते
मुझको बचपन मे लेके जाते
कभी हंसा हंसा के रूलाते
कभी रुला रुला के हसांते
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