Friday, December 7, 2018

sapne

किसी के सपने मछली जैसे
नींद खुली और तडप जाते
चाय नाश्ते तक आते आते मर जाते
किसी के सपने तितली जैसे
उठते ही उड़ने लगते
कली कली फिरने लगते
रात तक थक के सो जाते है
मेरे सपने जाने कैसे
हमेशा भूत की बात्तों जैसे
पीछे जाते पीछे चलते
मुझको बचपन मे  लेके जाते
कभी हंसा हंसा के रूलाते
कभी रुला रुला के हसांते 

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