जब मैंने नयी कार खरीदी तभी मेरे एक रिश्तेदार ने भी कार खरीदी
मेरी कार का बजट शुरू में २ लाख था जो कार फाइनल हुई वो ८ लाख की थी... बहुत खुश था मैं
कुछ दिनों के बाद अचानक मेरी ५ साल की चुलबुल बेटी मेरे पास आयी और बोली
पापा पापा फूफाजी जी कार तो उपर से खुलती भी है... और डबलू ( फूफाजी का बेटा ) उस से बहार भी देख पाता है. हमारी कार में ऐसा क्यों नहीं है?
कुछ देर सोचने के बाद मैंने बोला : बेटा उनकी कार उपर से टूटी हुई है वो एक "टूटी हुई कार"
है। .इसलिए डबलू बाहर देख पाता है
बच्ची ये सोच के बहुत खुश हुई। . और फिर अपने खेलने में लग गयी। ..
तभी मुझे मेरा बचपन याद आया। . जब मेरे पापा ने स्कूटर ख़रीदा था और मेरे एक दूर के अंकल ने कार...
तब मैंने अपने पापा को कहा । . पापा हमने कार क्यों नहीं खरीदी?
तब पापा ने कुछ देर सोचने के बाद कहा था बेटा कार मे "ताजी हवा" नहीं आती और वो बंद बंद होती है। .हम स्कूटर पे ताज़ी हवा में घूम पाते है। ..
किरदार वही है पिता और बच्चे का... उम्र भी वही है। ...
पिता ने मेहनत भी दोनों बार की। ..
बस इंसान की ज्यादा पाने की चाहत
"ताजी हवा" की जगह "टूटी हुई कार" ने ले ली।
मेरी कार का बजट शुरू में २ लाख था जो कार फाइनल हुई वो ८ लाख की थी... बहुत खुश था मैं
कुछ दिनों के बाद अचानक मेरी ५ साल की चुलबुल बेटी मेरे पास आयी और बोली
पापा पापा फूफाजी जी कार तो उपर से खुलती भी है... और डबलू ( फूफाजी का बेटा ) उस से बहार भी देख पाता है. हमारी कार में ऐसा क्यों नहीं है?
कुछ देर सोचने के बाद मैंने बोला : बेटा उनकी कार उपर से टूटी हुई है वो एक "टूटी हुई कार"
है। .इसलिए डबलू बाहर देख पाता है
बच्ची ये सोच के बहुत खुश हुई। . और फिर अपने खेलने में लग गयी। ..
तभी मुझे मेरा बचपन याद आया। . जब मेरे पापा ने स्कूटर ख़रीदा था और मेरे एक दूर के अंकल ने कार...
तब मैंने अपने पापा को कहा । . पापा हमने कार क्यों नहीं खरीदी?
तब पापा ने कुछ देर सोचने के बाद कहा था बेटा कार मे "ताजी हवा" नहीं आती और वो बंद बंद होती है। .हम स्कूटर पे ताज़ी हवा में घूम पाते है। ..
किरदार वही है पिता और बच्चे का... उम्र भी वही है। ...
पिता ने मेहनत भी दोनों बार की। ..
बस इंसान की ज्यादा पाने की चाहत
"ताजी हवा" की जगह "टूटी हुई कार" ने ले ली।
7 comments:
Good one(W)
और इसी चाहत ने आज हमे इस कदर स्वार्थी बना दिया है कि अपने जीवन मे इस मृगतृष्णा को पाने के लिए हम किसी भी हद को पार कर गुजरने में भी नही हिचकते। मेरा वाला फ्लैट उसके फ्लैट से छोटा क्यो? गाड़ी छोटी क्यो? Tv स्मार्ट नही तो बेकार। स्मार्ट फोन एप्पल का वो भी लेटेस्ट मॉडल। क्या भौतिक वस्तु सच मे इतना मायने रखने लगी है कि वास्तविक रिश्ते बोने हो गए है।
प्रदीप सच मे एक अच्छा और सटीक लेख है।।।।
Good one Pradeep..keep writing.
Superb !! Keep writing
Very nice bhaiya good keep it up
Very Nice. Bachpan ki yaad aa gyi 👌👌
Bahut sundar
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