बहूत ज़ख्म पाले हो ,
एक अरसे से सीने में .
मरहम लगाया होता तो नासूर नहीं होते
किसी को माफ़ किया होता
किसी से माफ़ी मांगी होती
तो ज़िन्दगी तेरे इतने रकीब नहीं होते
नासूर = ऐसा दर्द जीका कोई इलाज़ नहीं
अरसे = समय
रकीब = दुश्मन
एक अरसे से सीने में .
मरहम लगाया होता तो नासूर नहीं होते
किसी को माफ़ किया होता
किसी से माफ़ी मांगी होती
तो ज़िन्दगी तेरे इतने रकीब नहीं होते
नासूर = ऐसा दर्द जीका कोई इलाज़ नहीं
अरसे = समय
रकीब = दुश्मन
1 comment:
सिर्फ़ एक शब्द...बेहतरीन
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