Tuesday, November 21, 2023
Monday, October 16, 2023
Tuesday, September 5, 2023
Tuesday, August 22, 2023
Tuesday, July 4, 2023
chalna chaiye
जहां किसी से दोस्ती ना हो ,
ना ही हो कोई दुश्मन ,
बस चेहरे ही चेहरे हो ,
और खुशी
जहां रहते हो सब
बस खुश रहने के लिए ,
ना की किसी को दुखी
देखने के लिए ।
,,,,,,
जहां
Saturday, July 1, 2023
पीना छोड़ा
पीना छोड़ा जीना छोड़ा,
यारो के घर आना छोड़ा,
यारो के घर जाना छोड़ा
लंबी बातों , मीठी यादों
गम के अफसानो को छोड़ा,
पीना छोड़ा ,,,
हरिवंश के छंद भी को छोड़े ,
गालिब की गजलों को छोड़ा।
पीना छोड़ा,,
अच्छा मौसम जीना छोड़ा ,
गम के आलम में हंसना छोड़ा।
पीना छोड़ा ।।।
Monday, June 12, 2023
jeev Bramh aur aatma
हर चीज को दो तरीकों से जाना जा सकता है , एक उसका रूप और दूसरा उसका स्वरूप।
जैसे की गहने ( कंगन , झुमका ,हार आदि) ये सब सोने (गोल्ड) के रूप है और सोना इनका स्वरूप।
हम सब जीव भी इसी तरह है आत्म या ब्रह्म ही पर कोई प्रदीप बना बैठा है तो कोई अर्जुन या यूं कहिए की कोई इंसान कोई जानवर , कोई जीव कोई पत्थर ।
अब बात ये है की कंगन को कैसे पता लगेगा की वो सोना है कंगन नही ?
या अर्जुन कैसे पता करे की वो ब्रह्म है , आत्मा है अर्जुन नही ?
कंगन को पिगलना होगा , आग में जलना होगा , तब जाके वो अपने रूप को छोड़ अपने स्वरूप को पाएगा , इसी तरह अर्जुन या जीव को भी अपने अहंकार को पिगलाना होगा , तभी वो जान पाएगा की वो आत्मा है ब्रह्म नही ।
जानने वालों ने बताया है की यही पर जीव से गलती हो जाती है , वो जानने नही पर मानने लग जाता है की वो आत्मा है या ब्रह्म है , जानने की कोशिश भी नही करता बस मान जाता है और दोहराए चला जाता है " अहम ब्रमहस्मी"
प्रदीप देवानी ~pd
Subscribe to:
Posts (Atom)